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क्यों केवल कृष्ण प्रसाद?

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संस्कृत शब्द "प्रसाद" का शाब्दिक अर्थ दया है। इसलिए जब हम कहते हैं कि "कृष्ण प्रसाद" हम कृष्ण की दया की बात कर रहे हैं कृष्ण हर चीज का मालिक है और हम उसकी दया के बिना कुछ नहीं कर सकते हम उन चीजों को ले सकते हैं जो कृष्ण उपलब्ध कराने और इन कच्चे माल का इस्तेमाल कुछ उत्पादन करने के लिए करते हैं। कुछ बनाने के लिए, हम कृष्ण द्वारा हमें भेंट की जाने वाली बुद्धि का उपयोग करते हैं। इस प्रकार, हम कुछ भी नहीं कर सकते जब तक कृष्ण कच्चे माल प्रदान नहीं करते। प्रसाद की अवधारणा इस तथ्य को पहचानना है कि हर चीज कृष्ण की है और क्योंकि ये चीजें कृष्ण से संबंधित हैं, उन्हें कृष्ण की खुशी के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। प्रसाद कहते हैं कि कृष्ण के लिए प्यार और भक्ति के साथ तैयार किया गया कुछ अवशेष और उनके आनंद के लिए उन्हें प्रस्तुत किया गया है। क्योंकि कृष्ण ने इसे चख लिया है या आनंद लिया है, प्रसाद कोई भौतिक वस्तु नहीं है एक बार कृष्णा कुछ स्वाद लेता है, यह ट्रान्सेंडैंटल है। प्रसाद के बारे में कुछ बहुत अच्छा है जो भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु के इस अनुभव से वर्णन किया गया है ...

KRISHNA'S MATHS OF RETURN THINGS

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Physically viewable in this whole world, there is nothing in which the person gets ten times one, but every step taken Krishna's devotion, Krishna also takes ten steps to his devotees and only by taking the steps of Krishna Only the material creatures of the world are saved. This thinking is of a physical verb person. इस पूरे संसार में भौतिक रूप से देखा जाए तो एसा कुछ भी नहीं है जिसमें व्यक्ति को एक का दस गुना मिले लेकिन कृष्ण भक्ति की ओर उठते हर एक कदम पर कृष्ण भी अपने भक्तों की ओर दस कदम उठाते हैं और कृष्ण के कदम उठाने मात्र से ही संसार के भौतिक जीवों का उद्धार हो जाता है। यह सोच एक भौतिक वादि व्यक्ति की हैं।

ATTRACTION OF RADHA KRISHNA

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Whoever has developed an attraction of Radha-Krishna's beauty, can not attract the artificial beauty of this material world. जो भी राधा-कृष्ण के सौंदर्य के प्रति आकर्षण उत्पन्न कर चुका है उसे इस भौतिक संसार का कृत्रिम सौंदर्य आकर्षित नहीं कर सकता।

REFLECTION OF CONSCIOUS KRISHNA LOVE

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In this physical world, love is only a reflection of the true love of Lord Krishna. If you love Lord Krishna in any state, then never will be desperate because Lord Krishna is full of Sat, Chit and Anand. ईस भौतिक संसार में प्रेम-सम्बन्ध भगवान कृष्ण के वास्तविक प्रेम-सम्बन्ध का प्रतिबिंब मात्र है।यदि आप भगवान कृष्ण से किसी भी अवस्था में प्रेम करते हैं तो कभी भी हताश नहीं होंगे क्योंकि भगवान कृष्ण सत,चित और आनंद से पूर्ण है।

TRUST ACCEPTANCE

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Proof is required to accept everything in the world without proof, which is accepted without proof can not be considered truth, but the truth does not require anybody's belief or acceptance because there is no substitute for the truth and with time Does not change. दुनिया में हर बात को स्वीकार करने के लिए प्रमाण की आवश्यकता होती है बिना प्रमाण के जिसका स्वीकार होता है उसे सत्य नहीं समझा जाता परंतु सत्य को किसी के विश्वास या स्वीकार की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि सत्य का कोई विकल्प नहीं होता ओर वह समय के साथ बदलता नहीं है।

DISCOVER THE TRUTH

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Every person in the world is based on the deeds of his previous lives, but the birth of the next birth is in his hands, but every man remains unaware of this and lives his life in the fulfillment of the idioms, desires and desires of nature. In the life of every human being, the ultimate goal is to discover the truth that exists in it and everything in the world. HARE KRISHNA. दुनिया मे  हर एक मनुष्य का प्रारब्ध उसके पूर्व जन्मों के कर्म पर आधारित होता है किन्तु आने वाले जन्म का प्रारब्ध उसके हाथ में होता है लेकिन हर मनुष्य इस बात से अनभिज्ञ रहकर मोह,माया एवं प्रकृति से प्राप्त ईन्दीयो की तृप्ति में अपना जीवन व्यतीत करता है।जीवन में हर मनुष्य का परम लक्ष्य उस सत्य की खोज करना है जो उसमें ओर संसार की हर वस्तु में विद्यमान है।हरे कृष्ण।

DESTROY INDIVIDUAL DIFFERENCES

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Every person in the world wants to prove every thing in front of every one everywhere, but he can not do it because there is a difference in the views of each individual and the differences here will have to be overcome and we will have to take initiative because we It is also among those people who want to prove something in front of them. दुनिया में हर व्यक्ति हर बार हर जगह हर एक के सामने हर बात को साबित करना चाहता है लेकिन वह कर नहीं पाता क्योंकि हर एक व्यक्ति के विचारों में भिन्नता पाई जाती है ओर यहीं भिन्नता हमें दूर करनी होगी और उसकी पहल हमें करनी होगी क्योंकि हम भी उन व्यक्तियों में से है जिसके सामने भी कोई कुछ साबित करना चाहता है।