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इस भौतिक जगत का अकेलापन।Loneliness of the physical world.

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 हरे कृष्णा। क्या आप जानते हैं कि हम जिस भौतिक संसार में रह रहे हैं उसका सबसे बड़ा और अंतिम सत्य क्या है? वह सत्य है मृत्यु। मृत्यु इस भौतिक संसार की ईश्वर के द्वारा रची गई काल की व्यवस्था है जिससे कोई भी निर्लिप्त नहीं रह सकता हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी प्रकार की प्रक्रिया के द्वारा ईश्वर को प्राप्त करने के लिए प्रयास कर रहा हो और वह सफल भी होगा फिर भी उसे मृत्यु का सामना तो करना ही पड़ेगा। हम यह नहीं सोच सकते की उनकी मृत्यु नहीं होगी और यह जो हमारा मृत्यु के प्रति जो भय हैं वह उतना डरावना नहीं है कि जितना हम उसे समझते हैं भगवान श्री कृष्णा भगवत गीता के 2 अध्याय के 20 श्लोक में कहते हैं "न जायते म्रियते वा कदाचि-  न्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः।  अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो-  न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥" अर्थात आत्मा जो है वह किसी भी काल में नहीं जन्म लेता है ना ही उसका मृत्यु होता है ना उसे बनाया जा सकता है वह तो अजय नित्य शाश्वत और पौराणिक है और शरीर के नाश के साथ उसका नाश कभी नहीं हो सकता। हमारी मूर्खता यह है कि हम उस मृत्यु को अंत मान लेते हैं और मनुष्य को कभी भी अ...